Feb 04,2026
Shankh ka dharmik mahatva: सनातन धर्म में किसी भी पूजा या धार्मिक कार्य की शुरुआत बिना शंख के नहीं की जाती है. शंख के इस्तेमाल किए जाने के कई कारण हैं. प्राचीन समय में शंख का नाद ना केवल धार्मिक कार्यों में किया जाता था बल्कि युद्ध क्षेत्र में भी किया जाता था. धार्मिक कार्यों में शंख जहाँ सुख, समृद्धि के लिए बजाया जाता था, वहीं युद्ध में शंख विजय का प्रतीक होने के साथ-साथ दुश्मनों को भयभीत करने और चेतावनी देने का माध्यम भी होता था. अथर्ववेद के अनुसार, शंखनाद से राक्षसों का नाश होता है. इसलिए, पहले देवी-देवता भी युद्ध के समय दैत्यों मे भय उत्पन्न करने के लिए शंखनाद किया करते थे. शंख की ध्वनि शुभता को दर्शाती है. हिन्दू पूजा-पद्धति में शंख बजाया जाता है. भगवान विष्णु जी के हाथों में भी शंख है, जिसका नाम पांचजन्य है. ब्रह्मवैवर्त पुराण में शंख के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि शंख में जल रखने और इसे छिड़कने से वातावरण शुद्ध होता है. अर्थात शंख धार्मिक और वैज्ञानिक रूप से बेहद ही महत्वपूर्ण है....तो आइए ऐसे में ज्योतिर्विद शैलेंद्र पांडेय जी से जानते हैं कि, शंख का धार्मिक महत्व क्या है ?...